शुक्रवार, 22 दिसंबर 2017

स्कूल गया बच्चा : आरसी चौहान



बच्चा फूल है
ओस का
बच्चा फूल है बादल का
बच्चा आधार है भविष्य का
बच्चा धूप की नरम किरण है
बच्चा पेण्डूलम है घड़ी का
घंटियों की टून टून है बच्चा
स्कूल गया बच्चा
अभी लौटा नहीं है रात तक
घड़ी चल रही है
बिना पेण्डूलम की
लेकिन घंटी
बिना पेण्डूलम की कैसे बजेगी
आज मां
बिना पेण्डूलम की घंटी सी हो गई है।

रविवार, 27 अगस्त 2017

जो कभी हुआ ही नहीं : आरसी चौहान






एक सपना
जिसे देखा ही नहीं कभी मैंने
अधजगी आंखों से
सुनहली रातों में
डरता रहा बहुत दिनों तक
उसके नुकीले नाखूनों से

एक अंधड़ तूफान
जिसमें उड़ता रहा
जिंदगी भर धुल धक्क्ड़ की माफिक
जो हकीकत में कभी आया ही नहीं

एक फूल
हमेशा करता रहा परेशान
अपनी ताजगी और महक से
जो खिला ही नहीं मेरे जीवन में
कभी संजीदगी से

एक नदी
जो मेरे भीतर
बलखाती हुई कभी बही नहीं
आज आमदा है तोड़ने को
सारे सब्रो का तटबंध

और अब एक प्रेम
जो कभी हुआ ही नहीं किसी से
आज बांध की तरह खड़ा है
डूब कर बह जाने तक
मेरे साथ-साथ।


संपर्क-   आरसी चौहान (प्रवक्ता-भूगोल)
             राजकीय इण्टर कालेज गौमुख, टिहरी गढ़वाल उत्तराखण्ड 249121
             मेाबा0-8858229760ईमेल-puravaipatrika@gmail.com